Rajasthan me kisan aandolan | राजस्थान में किसान आंदोलन | Rajasthan Gk

Rajasthan-ke-kisan-aandolan
Rajasthan-ke-kisan-aandolan

in this post i am going to tell about rajasthan me kisan aandolan pdf very well. this is very helpful for your exam which have Rajasthan GK.

नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आपको राजस्थान सामान्य ज्ञान का महत्वपूर्ण टॉपिक राजस्थान में किसान आंदोलन के बारे में बताने वाला हूँ | इस पोस्ट में मैंने राजस्थान में किसान आंदोलन टॉपिक को बहुत अच्छे से समझाया है |

तो चलिए शुरू करते है , राजस्थान में किसान आंदोलन Notes के इस महत्वपूर्ण टॉपिक को-

राजस्थान में किसान आंदोलन Rajasthan me kisan aandolan

राजस्थान में किसान आंदोलन जागीरदारों, सामंतों आदि के द्वारा आर्थिक कर वसूली व उनके द्वारा किए गए अत्याचारों के विरुद्ध शुरू हुए।

✓ जागीरदार अपनी विलासिताओं को पूर्ण करने के लिए पर विभिन्न प्रकार के कर और बेगार आदि के रूप में आर्थिक दबाव डाल रहे थे।

✓ इन्हीं के परिणाम स्वरूप राजस्थान में किसान आंदोलनों का उदय हुआ।

बिजोलिया किसान आंदोलन

• भारत में प्रथम संगठित किसान आंदोलन का श्रेय मेवाड़ के बिजोलिया क्षेत्र को जाता है।

• बिजोलिया के किसानों से 84 प्रकार का लगान वसूल किया जाता था।

• 1903 में राव कृष्ण सिंह ने ऊपर माल की जनता पर चंवरी कर लगा दिया, जिससे परेशान होकर किसानों ने खेतों की परत छोड़ दी।

• जिससे घबराकर रामकृष्ण सिंह ने चंवरी कर( लड़की की शादी में ₹5 कर देना) को हटा दिया और सानू पद के आदि स्थान पर2/5 कर ही लेने की घोषणा की।

• 1906 में पृथ्वी सिंह नया जागीरदार बना, उधर बनते ही जनता पर तलवार बंधाई कर लगा दिया।

• साधु सीताराम दास के आग्रह पर 1916 ई. में बिजोलिया किसान आंदोलन में श्री विजय सिंह पथिक ने प्रवेश किया।

• पथिक जी ने बिजोलिया किसान आंदोलन में नई जान डालने राजनीति गति देने हेतु कानपुर से प्रकाशित होने वाले प्रताप नामक समाचार पत्र में बिजोलिया किसान आंदोलन की जानकारी दिलवाई।

• विजय सिंह पथिक के खिलाफ गिरफ्तार वारंट निकाला गया।

• पथिक जी उमा जी के खेड़े में स्थित वीरान मकान में रहने लगे, यही स्थान बिजोलिया किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र बना।

• 1918 में किसानों ने कर देना बंद कर असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया।

• पथिक जी ने ऊपर माल पंच बोर्ड की स्थापना कर श्री मन्ना पटेल को इसका सरपंच नियुक्त किया।

• 1920 के नागपुर अधिवेशन में गांधी जी ने बिजोलिया किसान आंदोलन को आशीर्वाद दिया।

• 1919 में न्यायमूर्ति बिंदु लाल भट्टाचार्य की अध्यक्षता में महाराणा ने जांच आयोग गठित किया।

• आयोग ने सभी लागबाग बंद करने तथा किसानों को जेल से रिहा करने की सिफारिश की।

• लेकिन महाराणा ने कोई निर्णय नहीं लिया।

• 1922 में एन जी जी रोबोट के प्रयासों से किसानों के जागीरदारों के मध्य समझौता हुआ।

• जिसमें 84 में से 35 लगान बंद कर दिए गए।

• 1927 में इस आंदोलन की कमान माणिक्य लाल वर्मा को सौंपी गई।

• किसान आंदोलन का अंत 1971 ई. में हुआ।

• मेवाड़ के प्रधानमंत्री सर टी विजय राघवाचार्य के आदेश से तत्कालीन राजस्व मंत्री डॉ मोहन सिंह मेहता मैं ब्रिटिश प्रेसिडेंट विक्की लेंस बिजोलिया गए।

• माणिक्य लाल वर्मा जी व अन्य किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान करवाया।

• बिजोलिया किसान आंदोलन भारत का प्रथम संगठित, अहिंसात्मक व सबसे लंबा लगभग 44 वर्षों तक चलने वाला आंदोलन था।

बेंगू किसान आंदोलन

• बे गू के किसानों से 25 प्रकार की लालबाग कर ली जाती थी।

• यह गांव पहले भीलवाड़ा में ,वर्तमान में चित्तौड़गढ़ में स्थित है।

• 1921 में आंदोलन का शुभारंभ मेनाल नामक स्थान के भैरव कुंड से हुआ।

• जिसका नेतृत्व रामनारायण चौधरी ने किया।

• 1923 में किसानों के ठाकुर अनूप सिंह के मध्य समझौता हुआ जिसे मेवाड़ सरकार ने बोल्शेविक समझौते की संज्ञा दी।

• मेवाड़ सरकार ने इस मामले की जांच हेतु ट्रेंस आयोग गठित किया, जिसने चार मामूली लागतो को छोड़कर शेष सभी लागतो और बेगार को उचित ठहराया।

• 13 जुलाई 1922 में ट्रेन चाहिए को पर विचार करने के लिए एक सभा बुलाई गई।

• इस सभा पर ट्रेंच ने घेर कर गोली चला दी, इसमें रूपा जी और कृपा जी धाकड़ नामक 2 किसान शहीद हो गए।

• रामनारायण चौधरी के बाद माणिक्य लाल वर्मा ने आंदोलन का नेतृत्व किया और बेंगू किसान आंदोलन 1925 में समाप्त हुआ।

बूंदी किसान आंदोलन

• बूंदी के किसानों को 25 प्रकार के लागबाग जागीरदार को देनी पड़ती थी।

• 1922 में किसानों ने बूंदी प्रशासन के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया।

• 1922 में बूंदी सरकार ने किसानों को लागबाग में कुछ रियायतो की घोषणा कर दी।

• बूंदी किसान आंदोलन का नेतृत्व पंडित नेयनू राम शर्मा ने किया।

• 2 अप्रैल 1923 में डब्बी नामक स्थान पर किसानों की सभा पर सरकारी सैनिकों ने अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दी ।

• इस गोलीकांड में झंडा गीत गाते हुए नानक जी भील और देवीलाल गुर्जर किसान शहीद हो गए।

• माणिक्य लाल वर्मा ने इस आंदोलन में सहायता प्रदान की।

• 1923 में यह आंदोलन समाप्त हो गया।

अलवर का किसान आंदोलन

• यहां पर भू राजस्व की सबसे गलत पद्धति “इजारा पद्धति” लागू थी। जिसके तहत ऊंची बोली बोलने वाले को निश्चित भूमि निश्चित अवधि के लिए दे दी जाती थी।

• 1924 में भूमि की नई दरों के विरोध में किसानों ने विद्रोह किया।

• इस आंदोलन का मुख्य केंद्र नींमूचना नामक गांव था।

• निमूचना में मई 1925 में भारी संख्या में राजपूत एकत्रित हुए, उन किसानों पर अलवर महाराजा के ए गठित आयोग ने गोलियां चला दी।

• इसमें सैकड़ों व्यक्तियों की मृत्यु हुई।

• गोली कांड की पूरी कहानी को तरुण राजस्थान समाचार पत्रिका में प्रकाशित किया गया।

• महात्मा गांधी ने इस हत्याकांड को जलियांवाला बाग हत्याकांड से ज्यादा वीभत्स बताया और दोहरा हत्याकांड की संज्ञा दी।

• 18 नवंबर 1925 में अलवर सरकार ने यह आदेश जारी किया किसानों से लागबाग पुराने बंदोबस्त के अनुसार ही लिया जाएगा।

• इस प्रकार नींमूचना किसान आंदोलन का अंत हुआ।

बीकानेर किसान आंदोलन

• यह आंदोलन पूरा टैक्स लेकर भी कम मात्रा में पानी देने के कारण हुआ।

• बीकानेर में खालसा भूमि का( 2/5 भाग) व जागीरी क्षेत्र(3/5 भाग) आता था।

• बेगार व लागबाग के संबंध में 1937 में जीवन चौधरी के नेतृत्व में गांव उदासर बीकानेर में हुआ।

• 30 मार्च 1949 में लोकप्रिय शासन की स्थापना के साथ ही किसानों की समस्या समाप्त हो सकी।

दूधवा-खारा किसान आंदोलन

• बीकानेर रियासत की दूधवा-खारा पता कांगड़ा गांव के किसानों ने जमीदारों के अत्याचारों के विरोध में आंदोलन किया।

• इस आंदोलन को 1944-45 में किसान नेता हनुमान सिंह और मेघाराम वैध के द्वारा सरंक्षण प्रदान किया गया।

चिड़ावा किसान आंदोलन

• उत्तर प्रदेश के रहने वाले मास्टर प्यारेलाल गुप्ता ने 1922 में अमर सेवा समिति की स्थापना की।

• जिसके सात सदस्यों को खेतड़ी नरेश अमर सिंह ने गिरफ्तार कर घोड़ों के पीछे बांध करके घसीट कर खेतड़ी की जेल में डाल दिया।

• मास्टर प्यारेलाल गुप्ता ने 3 दिन तक बिना अन्न जल ग्रहण किए बेहोश पड़े रहे। Rajasthan Me Kisan Aandolan

• इसकी सूचना पूरे देश में बिजली की तरह फैल गई, इसी कारण क्रांतिकारियों के द्वारा इसका विरोध किया गया।

• 23 दिन बाद सभी क्रांतिकारियों को छोड़ दिया गय। Rajasthan Me Kisan Aandolan

• इसीलिए मास्टर प्यारेलाल गुप्ता को चिड़ावा का गांधी कहा जाता है।

राजस्थान में प्रमुख जनजाति आंदोलन

✓ राजस्थान में भील, मीणा, गरासिया आदि जनजातियां प्राचीन काल से ही निवास करती आई है।

✓ राजस्थान के डूंगरपुर व बांसवाड़ा क्षेत्र में भील जनजाति का बाहुल्य है।

✓ मेवाड़ राज्य की रक्षा मे यहां के भीलों ने सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

✓ अंग्रेजों द्वारा लागू की गई आर्थिक सामाजिक व प्रशासनिक नीतियों के विरोध के फल स्वरुप सर्वप्रथम राजस्थानी जनजातियों व आदिवासियों ने आंदोलन किया।

भगत आंदोलन

• भीलो के भगत आंदोलन के प्रणेता गोविंद गिरी थे।

• इन्होंने भीलों में जागृति व सामाजिक सुधार लाने के लिए प्रयास किया। इसे भगत आंदोलन के नाम से जाना जाता है।

• 1883 ई. में गोविंद गिरी ने संप सभा का गठन किया।

• संप सभा का पहला अधिवेशन 1930 में मानगढ़ पहाड़ी में किया।

• 17 नवंबर 1913 को अंग्रेजी सेना ने मानगढ़ पहाड़ी को घेर कर उपस्थित भीलों पर गोली चला दी।

• जिसमें 1500 स्त्री-पुरुष शहीद हो गए।

• इसे भारत का दूसरा जलियांवाला बाग हत्याकांड कहते हैं।

• इस प्रकार इस आंदोलन को कुचल दिया गया। Rajasthan Me Kisan Aandolan

एकी / भोमट आंदोलन

• इस आंदोलन के प्रणेता मोतीलाल तेजावत थे।

• इन्हें भील अपना मसीहा मानती थी अतः इन्हें बावजी के नाम से पुकारते थे।

• तेजावत के भीलों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एक 11सूत्री जांच का एक प्रारूप तैयार करवाया।

• इसे मेवाड़ पुकार की संज्ञा दी गई। Rajasthan Me Kisan Aandolan

• 9 मार्च 1922 को नींमडा गांव मे तेजावत जी का सम्मेलन हो रहा था जिस पर पुलिस ने गेर कर उन पर गोलियां चलाई।

• लगभग 1220 भील शहीद हो गए और तेजावत के भी पैर में गोली लगी।

• नींमडा हत्याकांड को एक दूसरे जलियांवाला बाग हत्याकांड की संज्ञा दी गई। Rajasthan Me Kisan Aandolan

• अंग्रेजों ने व राज्य सरकार सेना ने दमन कर आंदोलन को समाप्त कर दिया।

• 3 जून 1922 को मोतीलाल तेजावत ने आत्मसमर्पण कर दिया।

• मोतीलाल तेजावत को मेवाड़ का गांधी भी कहा जाता है।

राजस्थान के मेले पढने के लिए क्लिक करे |

राजस्थान के दुर्ग पढने के लिए क्लिक करे |

1 Trackback / Pingback

  1. rajasthan ka itihas | राजस्थान का इतिहास |Rajasthan Gk rajasthan-ka-itihas

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*