Rajasthan ki nadiya pdf | राजस्थान की नदिया | Rajasthan Gk

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नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आपको राजस्थान सामान्य ज्ञान का महत्वपूर्ण टॉपिक राजस्थान की नदियाँ PDF के बारे में बताने वाला हूँ | इस पोस्ट में मैंने राजस्थान की नदियाँ के टॉपिक को बहुत अच्छे से समझाया है |

तो चलिए शुरू करते है , राजस्थान की नदियाँ Notes के इस महत्वपूर्ण टॉपिक को-

राजस्थान की नदिया |Rajasthan ki nadiya

राजस्थान अपवाह प्रणाली : नदियां

=>विश्व में कुल जल राशि का 97.3% भाग महासागरीय जल का है। जो कि लवणीय हैं।

=

>शेष 2.7% जल मानव के लिए उपयोगी है। यह जल नदियों, नेहरो, तालाबों, नलकूप एवं वर्षा से प्राप्त होता है।

राजस्थान में विसर्जन के आधार पर तीन तरह का अपवाह तंत्र पाया जाता है-

आंतरिक प्रवाह की नदियां
=>वे नदियां जो अपना जल अगर यह महासागर में नहीं डाले और जमीन में विलुप्त हो जाए उनका प्रवाह क्षेत्र आंतरिक प्रवाह क्षेत्र एंव वो नदियां आंतरिक प्रवाह की नदियां कहलाती है।

=>अरब सागर की ओर जाने वाली नदियां – वे नदियां जो अपना जल अरब सागर में डालें वह नदियां अरब सागर की ओर जाने वाली नदियां कहलाती है।

=>बंगाल की खाड़ी की ओर जाने वाली नदियां। – वे नदियां जो अपना जल बंगाल की खाड़ी में डाले वो नदियां बंगाल की खाड़ी की ओर जाने वाली नदियां कहलाती है।

ये भी जाने :-

खादर – वह क्षेत्र जहां नदियां प्रतिवर्ष बहती है और अपने साथ उपजाऊ मिट्टी बहा कर लाती है ऐसी उपजाऊ मिट्टी से बने मैदान को खादर कहते हैं।

बांगर – वर्तमान में वहां कोई नदी नहीं बहे अतः पुरानी उपजाऊ मिट्टी धीरे-धीरे अनुपजाऊ मिट्टी बन जाए, सामान्य भाषा में लिसन अनुपजाऊ मिट्टी के मैदान को बांगर कहते हैं।

भावर व तराई – हिमालय से आने वाली गंगा और गंगा की सहायक नदियां अपने साथ लाए हुए बड़े-बड़े पत्थरों और कंकड़ों के जमाव का वह क्षेत्र बनाती है, जहां नदियां विलुप्त होती हुई प्रतीत होती है। पहाड़ से 15 किमी का यह क्षेत्र भवार प्रदेश के कहलाता है। जहां घस के संघन वन, मक्खी मच्छर और भारी शरीर वाले जानवर पाए जाते हैं क्षेत्र को तराई क्षेत्र कहते हैं।

1. अंतः प्रवाही अपवाह तंत्र

i . काकनय/ काकनी नदी

=>काकनी नदी को स्थानीय भाषा में मसूरदी नदी भी कहते हैं।

=>आंतरिक प्रवाह की सबसे छोटी नदी है।

=>जिसकी लंबाई 17 किलोमीटर है।

=>इस नदी का उद्गम जैसलमेर जिले के कोठारी गांव से होता है।* थोड़ी दूर आ गए चलकर यह मीठा खाड़ी नामक स्थान पर जमीन में विलुप्त हो जाती है।

ii . कांतली नदी

=>कांतली नदी का उद्गम जिले की खंडेला की पहाड़ियों से होता है।

=>जिसकी कुल लंबाई 100 किलोमीटर है।

=>यह नदी सीकर एवं झुंझुनू मैं बहते हुए चूरू की सीमा पर विलुप्त हो जाती है।

=>इस नदी के किनारे गणेश्वर सभ्यता विकसित हुई थी, जिसे हम ताम्र युगीन सभ्यता की जननी कहते हैं।

iii . साबी नदी

=>इस नदी का उद्गम जयपुर जिले में स्थित सेवर की पहाड़ियों से होता है।

=>यहां से निकलकर जयपुर व अलवर मैं बनने के बाद हरियाणा के गुड़गांव की रेवाड़ी तहसील के पटौदी नामक स्थान पर रैत में विलुप्त हो जाती है।

iv . मेंथा नदी

=>मेंथा नदी का उद्गम जयपुर जिले के मनोहरपुरा गांव की पहाड़ियों से होता है।

=>जयपुर नागौर में बहते हुए उत्तर की ओर से सांभर झील में विलुप्त हो जाती है।

v रुपनगढ़ का नाला

=>इसका उद्गम अजमेर जिले की किशनगढ़ की पहाड़ियों से होता है।

=>अजमेर एवं जयपुर में बहते हुए दक्षिण की ओर सांभर झील में विलुप्त हो जाती है।

vi घग्घर नदी

=>घग्घर नदी का उदगम हिमाचल प्रदेश के शिवालिक पहाड़ियों पर स्थित कालका माता मंदिर के समीप से होता है।

=>यह नदी राजस्थान में आंतरिक प्रवाह (465 किमी) की सबसे लंबी नदी है।

=>यह राज्य की एकमात्र अंतरराष्ट्रीय नदी एवं एक मात्र है वह नदी है जो राजस्थान में उतर दिशा से प्रवेश करती है। Rajasthan ki nadiya

=>घग्घर नदी का प्राचीन नाम सरस्वती नदी था। इसे नट नदी, लेटी हुई नदी, सोतर नदी के नाम से भी जाना जाता है।

=>यह नदी पंजाब व हरियाणा में बहते हुए राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले में टिब्बी तहसील के तलवाड़ा गांव में प्रवेश करती हैं।

=>ध्यान रहे तलवाड़ा झील राजस्थान की सबसे नीचे झील है तो राजस्थान की सबसे ऊंची झील नक्की झील सिरोही में है।

=>यह नदी हनुमानगढ़ में है तलवाड़ा से आगे बहते हुए भटनेर के मैदान में विलीन हो जाती है।

=>परंतु ज्यादा वर्षा हो जाने के कारण घग्घर नदी सूरतगढ़ या अनूपगढ़ में विलुप्त हो जाती है, लेकिन फिर भी सदा गुस्सा आए तो यह नदी के पाकिस्तान के बहावलपुर जिले में प्रवेश करती है लेकिन इस नदी का अंतिम प्रवाह क्षेत्र फोर्ट अब्बास है।

=>पाकिस्तान में इस नदी प्रवाह क्षेत्र को हकरा कहा जाता है।

vii रूपारेल नदी

=>किस नदी का उदगम अलवर जिले की थानागाजी तहसील की उदय नाथ की पहाड़ियों से होता है।

=>रूपारेल नदी को लससवारी नदी एवं स्थानीय भाषा में हो वराह नदी नाम से जाना जाता है।

=>यह नदी पुर में बहते हुए कुसुलपुर नामक स्थान पर भरतपुर में विलुप्त हो जाती है।

2.अरब सागर के अपवाह तंत्र की प्रमुख नदियां

i. माही नदी

=>माही नदी का उद्गम विंध्याचल पर्वत माला, मध्य प्रदेश के धार जिले के सरदार शहर में अवस्थित अमरेहू की पहाड़ियों में प्रवाहित मेहंद झील से होता है।

=>यह नदी राजस्थान में बांसवाड़ा जिले के खंडू गांव में प्रवेश करती है।

=>यह मध्यप्रदेश ,राजस्थान ,गुजरात राज्य में बहती है।

=>राजस्थान में इसकी लंबाई 171 किलोमीटर है।

=>जब किस की कुल लंबाई 576 किलोमीटर है। Rajasthan ki nadiya

=>आदिवासियों की गंगा, बांगड़ की गंगा, दक्षिणी राजस्थान की स्वर्ण रेखा के नाम से भी प्रसिद्ध है।

=>यह नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है उल्टी V भी आकार में बहती है।

=>एकमात्र ऐसी नदी है का प्रवेश एवं निकास दोनों ही दक्षिण दिशा से होता है।

=>माही नदी का प्रवाह क्षेत्र बांसवाड़ा में छप्पन का मैदान एवं प्रतापगढ़ में कांठल के नाम से जाना जाता है।

=>माही नदी पर आदिवासी क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजना “माही बजाज सागर परियोजना” संचालित है।

=>माही बजाज सागर बांध स्थान का सबसे लंबा बांध है।

=>जल आपूर्ति हेतु इसी नदी पर कागदी पिकप बांध का निर्माण किया गया है ।

=>यह गुजरात में बहने के बाद कैंबे की खाड़ी में होते हुए खंभात की खाड़ी में गिर जाती है।

=>माही परियोजना राजस्थान की 45% तथा गुजरात की 55% संयुक्त परियोजना है।

=>इस परियोजना के अंतर्गत माही नदी पर तीन बांध बनाए गए
हैं

बांध जिला
 माही बजाज सागर बांध बांसवाड़ा जिले में
कागदी पिकप बांधबांसवाड़ा जिले में
कडाना बांधगुजरात के अरावली जिले में

=>सोम, माही, जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर बेणेश्वर धाम स्थित है। Rajasthan ki nadiya

=>बेणेश्वर धाम पर माघ पूर्णिमा को आदिवासियों का मेला भरता है, जिसे आदिवासियों का कुंभ कहा जाता है।

=>माही की मुख्य सहायक नदिया – सोम माही जाखम अनास इरू हरण व मोरेल।

(अ) सोम नदी

=>सोम नदी का उद्गम राजस्थान के उदयपुर जिले में ऋषभदेव के समीप बाबलवाड़ा के जंगलों में स्थित बिछामेडा की पहाड़ियों से होता है। Rajasthan ki nadiya

=>यह नदी उदयपुर तथा डूंगरपुर के मध्य सीमा बनाती हुई, डूंगरपुर में बेणेश्वर नामक स्थान पर माही नदी में मिल जाती है।

(ब) जाखम नदी

=>जाखम नदी का उद्गम प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी में स्थित भंवर माता की पहाड़ियों से होता है।

=>जाखम नदी पर प्रतापगढ़ में जाखम बांध बनाया गया है, जो राजस्थान का सबसे ऊंचा बांध है (81 मीटर) ।

=>डूंगरपुर जिले की आशापुरा तहसील के नवताटपुरा गांव में बेणेश्वर नामक स्थान पर सोम वे माही में मिलकर त्रिवेणी संगम का निर्माण करती है।

  1. लूनी नदी

=>इसका उद्गम अजमेर की नाग पहाड़ियों से होता है।

=>अजमेर नागौर पाली जोधपुर बाड़मेर जालौर में बहने के पश्चात गुजरात के कच्छ के रण में विलुप्त जाती है।

=>495 किलोमीटर लंबी है यह नदी पूर्णतया बरसाती है।

=>इसका जल बालोतरा( बाड़मेर) तक मीठा व बाद में खारा है।

=>इस की सहायक नदियां सुकड़ी, मीठड़ी, बंडी खारी, जवाई, लीलड़ी , सागी जोजडी है।

3.बंगाल की खाड़ी के अपवाह तंत्र की प्रमुख नदियां Rajasthan ki nadiya

i. बाणगंगा नदी

=>बाणगंगा नदी का उद्गम जयपुर जिले में स्थित था बैराठ की पहाड़ियों से होता है।

=>इस नदी की कुल लंबाई किमी है, जिसके किनारे प्राचीन कालीन सभ्यता स्थल बैराठ अवस्थित है।

=>इस नदी के किनारे जमवारामगढ़ बांध बनाया गया।

ii.चंबल नदी

=>इसका उद्गम मध्य प्रदेश में इंदौर जिले की महू के निकट विंध्याचल पर्वत की जानापाव पहाड़ी से होता है।

=>राजस्थान चित्तौड़गढ़ के चौरासीगढ़ के निकट से प्रवेश करती है तथा दक्षिणी पूर्वी राजस्थान चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, करौली धौलपुर मैं बहती हुई यूपी में इटावा के निकट यमुना में मिल जाती है।

=>यह सवाई माधोपुर से धौलपुर जिले तक राजस्थान और मध्य प्रदेश की 252 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा बनाती है।

=>चंबल यमुना की मुख्य सहायक नदी है।

=>इस नदी पर भैंसरोडगढ़ के निकट चुलिया प्रपात है।

=>चंबल नदी तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तर प्रदेश में बहती है।

=>इसकी कुल लंबाई 1051 किलोमीटर है, राजस्थान में केवल 322 किलोमीटर बहती है।

=>इस नदी पर गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर व कोटा बैराज बने हुए हैं।

=>इस नदी का बहाव क्षेत्र उत्खात स्थलाकृति का है।

=>चंबल की सहायक नदियां मेज नदी, पार्वती नदी, कालीसिंध नदी बामणी नदी और बनास नदी है।

अ. बनास नदी :

=> इसका उद्गम राजसमन्द में कुंभलगढ़ के निकट खमनोर की पहाड़ियों से होता है।

=> राजस्थान में बहने वाली पूर्णता सबसे लंबी नदी( 512 किमी) है तथा यह बरसाती नदी है। राज्य में इसका जल ग्रहण क्षेत्र सर्वाधिक है।

=>टोंक जिले में इस नदी पर बीसलपुर बांध निर्मित है।

=>राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अजमेर, टोंक में बहकर सवाई माधोपुर में रामेश्वर के निकट चंबल में मिल जाती है।

=>बनास की सहायक नदियां बेडच, मानसी, मेनाल, मोरेल, कोठारी, व खारी है।

ब. मेज

=>चंबल की सहायक मेज नदी भीलवाड़ा के बिजोलिया से निकलकर बूंदी के लाखेरी नामक स्थान पर चंबल में मिल जाती है।

स. पार्वती

=>पार्वती नदी मध्य प्रदेश के देवास जिले में स्थित सीहोर क्षेत्र से निकलकर बारां जिले से राजस्थान में प्रवेश करती है।

द. कालीसिंध

=>कालीसिंध नदी मध्य प्रदेश के देवास जिले से निकलकर झालावाड़ जिले के रायपुर नामक स्थान से स्थान में प्रवेश करती है।

=>कालीसिंध नदी के सहायक नदिया आहू, परवन, निमाज, है।

राजस्थान के जलप्रपात

जलप्रपात नदी
भीमलत जलप्रपातमांगली नदी, भीनमाल (बूंदी)
मांगली नदी, भीनमाल (बूंदी)मेनाल नदी, भीलवाड़ा
चूलिया जलप्रपातचंबल नदी, भैंसरोडगढ़ (चितौड़गढ़
 अरणा झरना जलप्रपातशुष्क जलप्रपात
दमोह जलप्रपात बाड़ी (धौलपुर)

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