rajasthan ka itihas | राजस्थान का इतिहास |Rajasthan Gk

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नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आपको राजस्थान सामान्य ज्ञान का महत्वपूर्ण टॉपिक राजस्थान का इतिहास के बारे में बताने वाला हूँ | इस पोस्ट में मैंने राजस्थान का इतिहास टॉपिक को बहुत अच्छे से समझाया है |

तो चलिए शुरू करते है , राजस्थान का इतिहास Notes के इस महत्वपूर्ण टॉपिक को-

राजस्थान का इतिहास Rajasthan ka itihas

>यह शब्द इति+हास से मिलकर बना है। इति का अर्थ है पहले व हास का अर्थ है घटित होना अर्थात जो पहले घटीत हुआ।

👉 प्राचीन काल से वर्तमान तक की प्रमुख घटनाओं का तिथि क्रम के अनुसार संकलन करना इतिहास के लाता है।

👉 पुरातात्विक साक्ष्य या लेखन सामग्री को निम्न तीन भागों में बांटा गया है-

  1. प्रागैतिहासिक
  2. आद्य ऐतिहासिक
  3. ऐतिहासिक
  4. प्रागैतिहासिक :-

• इस समय के संदर्भ में कोई लिखित सामग्री प्राप्त नहीं हुई।

• केवल खुदाई से प्राप्त साक्ष्यों के सारे इतिहास के बारे में पता लगाया गया था।

• इसे निम्न तीन भागों में बांटा गया था

i. पुरापाषाण काल ii. मध्य पाषाण काल iii नवपाषाण काल

( i ) पुरापाषाण काल

✓ बिगोद( भीलवाड़ा), मंडपिया( चित्तौड़गढ़), डीडवाना( नागौर)

✓ इस समय के समकालीन उपकरण चीन, मयांमार, जावा आदि स्थानों से मिलते जुलते हैं। इस कारण यहां की सांस्कृति सोहन संस्कृति कहलाती है।

( ii ) मध्यपाषाण काल

✓ बागोर( भीलवाड़ा), तिलवाड़ा( बाड़मेर)

( iii ) नवपाषाण

✓ आहड( उदयपुर), ओझियाना, गिलुंड( राजसमंद), गणेश्वर( सीकर)।

✓ मनुष्य ने पहिए का आविष्कार इसी काल में किया।

✓ खेती करना इस काल में शुरू किया।

✓ मनुष्य द्वारा पहला हथियार का प्रयोग कुल्हाड़ी था।

  1. आद्य ऐतिहासिक काल

✓ 3000 ई. पू. से 600 ई. पू. तक।

✓ इस काल के लोगों को लेखन कला का ज्ञान था।

✓ इनकी लिपि को आज तक भी पढ़ा नहीं जा सकता, जैसे भारत की सिंधु घाटी सभ्यता, राजस्थान की कालीबंगा सभ्यता।

✓ पशु पालन करना इस काल में शुरू हुआ।

  1. ऐतिहासिक काल

✓ 600 ई. पू. काल का समय।

✓ इस काल में लिखित सामग्री मिली और इसे पढ़ा भी जा सकता है।

👉 अध्ययन की दृष्टि से काल

i. प्राचीन काल ii. मध्यकाल( मुगल काल)
iii. आधुनिक काल- 1857 की क्रांति से अब तक।

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं

कालीबंगा सभ्यता

✓ कालीबंगा सिंधी भाषा का शब्द है। जिसका अर्थ है काले रंग की चूड़ियां।

✓ स्थान – हनुमानगढ़ जिले में प्राचीन सरस्वती नदी किनारे।

✓ खोजकर्ता – अमलानंद घोष (1952)

✓ उत्खनन कर्ता – वी.के. थापर, वी. वी. लाल (1961-69)

✓ कालीबंगा सभ्यता स्थल सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन माना जाता है।

✓ प्रोफेसर दशरथ शर्मा ने कालीबंगा को सिंधु घाटी सभ्यता की तीसरी राजधानी कहां है।

✓ कालीबंगा एक कांस्य युगीन नगरी आघऐतिहासिक, पराग हड़प्पा कालीन/ उत्तर हड़प्पा कालीन सभ्यता स्थल है।

👉विशेषताएं

✓ यहां से विशाल स्नानागार मिले थे। जहां से पानी की निकासी के लिए लकड़ी की नालियां बनी हुई थी।

✓ विश्व में ऐसा उदाहरण कालीबंगा सभ्यता ही है।

✓ यहां से हमें सात हवन कुंड प्राप्त हुए। इससे श्री प्रथा का अनुमान लगाया जाता है।

✓ यहां प्राप्त नगर की सड़कें ग्रीड प्रणाली की सड़कें थी अर्थात सड़के समकोण प्रकार की थी। जिसे चेम्सफोर्ड या ऑक्सफोर्ड भी कहते हैं।

✓ यहां प्राप्त भवन पहले कच्ची ईंटों से तथा बाद में पक्की ईंटों से निर्मित थे।

✓ इंटो की लंबाई 30 : 15 : 75।

✓ यहां से हल से जूते हुए खेत और कपास की खेती के प्रमाण मिले हैं।

✓ यहां भवन के फर्श व अलंकृत( सजावटी) फर्श से निर्मित थे।

✓ यहां पर प्राप्त मुद्रा पर एक व्याग्र( चिता) व एक तरफ महिला कुमार देवी थी।

✓ इससे अनुमान लगा सकते हैं कि नारी की इज्जत की जाती थी।

✓ यहां से बालक की खोपड़ी मिली जिससे मस्ती क्षेत्र की शल्य क्रिया का अनुमान लगाया जाता है।

✓ यहां से हमें बेलनाकार मोहरे प्राप्त हुई जो मेसोपोटामिया( मिस्र) सभ्यता की है।

✓ यहां से गेहूं व जौ के अवशेष प्राप्त हुए।

✓ यहां अंडाकार कवर व चिरायु कवर के चिन्ह प्राप्त हुए।

✓ कालीबंगा सभ्यता के पतन के विचारार्थ

गणेश्वर सभ्यता

✓ स्थान – सीकर( नीमकाथाना तहसील, रेवासा गांव)

✓ नदी – कांतली नदी के पेटे में।

✓ खोजकर्ता – RC अग्रवाल (1972)

✓ उत्खनन – RC अग्रवाल, विजय कुमार।

✓ यहां प्राप्त स्थल ताम्र युगीन सभ्यता में सबसे प्राचीन स्थल है।

✓ अतः गणेश्वर सभ्यता को ताम्र युगीन सभ्यताओं की जननी कहा जाता है।

✓ इसे पुरात्व का पुष्कर कहा जाता है।

आहड़ सभ्यता( उदयपुर)

✓ खोजकर्ता : ए. के. व्यास( अक्षय कीर्ति व्यास)1953

✓ पुनः खोज : RCअग्रवाल (1956)

✓ उत्खनन कर्ता : धीरज कुमार संकलिया

✓ उदयपुर में बेड़च नदी के किनारे।

✓ उपनाम : अघाटपुर , ताम्र नगरी

✔️विशेषताएं

✓ यहां से तांबा गलाने की भटिया प्राप्त हुई है, इसलिए ताम्र नगरी के नाम से जाना जाता है।

✓ यहां से यूनानी तांबे की मोहरे मिली है।

✓ इसमें एक मुद्रा के एक और त्रिशूल दूसरी तरफ अपोलो देवता की तस्वीर है।

✓ यहां प्राप्त मकानों में एक से अधिक चूल्हों की संख्या देखी गई है। जिससे अनुमान लगाया लगाया जाता है कि सार्वजनिक भोजन की व्यवस्था की जाती थी।

✓ यहां अनाज को रखने के लिए मृत भंडार मिले जिन्हें गोरैया या कोर् कहा जाता है।

✓ यहां से टेराकोटा पद्धति से बनी हुई बेल की आकृति प्राप्त हुई है। जिसे बनासिया बुल की संज्ञा दी गई है।

बैराठ सभ्यता( जयपुर)

✓ यह प्राचीन मत्स्य जनपद की राजधानी रहा है।

✓ उस समय उसे विराटनगर के नाम से भी जाना जाता था।

✓ स्थान : बाणगंगा नदी के किनारे

✓ खोजकर्ता : (1936)रामबहादुर दयाराम सहानी

✓ उत्खनन : कैलाश दीक्षित, नील रतन बनर्जी

✔️ विशेषताएं

✓ 1837 में कैप्टन बर्ट ने यहां से सम्राट अशोक के भाब्रू शिलालेख की खोज की।

✓ इस शिलालेख में सम्राट अशोक ने बुद्ध ,धम्म संघ के प्रति आस्था प्रकट की।

✓ वर्तमान में भाब्रू शिलालेख कोलकाता संग्रहालय में रखा गया है।

✓ चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत की यात्रा की इस कारण हेनसांग को तीर्थ यात्रियों का और कहां जाता है।

✓बैराठ से सूती कपड़े में बंधी हुई मुद्राएं पंचमार्क सिक्के मिले हैं।

बागोर सभ्यता( भीलवाड़ा)

✓ स्थान : कोठारी नदी के किनारे

✓ उत्खनन कर्ता : वीरेंद्र नाथ मिश्र(1967-69) Rajasthan Ka Itihas

✓ बागोर सभ्यता स्थल आदिम संस्कृति का संग्रहालय कहा जाता है।

✓ भारत में सबसे प्राचीन पशुपालन अवशेष यही मिले हैं। Rajasthan Ka Itihas

✓ बागोर में उत्खनन करते समय टीलों को महासतियो का टीला कहा जाता है।

रेड सभ्यता( टोंक)

✓ ढील नदी के किनारे

✓ यहां से हमें एशिया का सबसे बड़ा सिक्कों का भंडार मिला है। इसलिए इसे भारत का टाटानगर कहते हैं।

✓ इस स्थान से जनपद युग की मुद्राएं व लोहे सामग्री के भंडार मिले हैं।

✓ यहां से मातृ देवी की मूर्तियां वर गजमुखी पक्ष की मूर्ति प्राप्त हुई थी।

तिलवाड़ा सभ्यता( बाड़मेर)

✓ लूनी नदी के किनारे

सोंथी सभ्यता( बीकानेर)

✓ उत्खनन कर्ता : अमलानंद घोष(1952) Rajasthan Ka Itihas

✓ यहां से कालीबंगा के समान सामग्री प्राप्त हुई है इसलिए इसे कालीबंगा प्रथम कहा जाता है।

रंगमहल सभ्यता( हनुमानगढ़)

✓ यह गांधार मूर्तिकला का प्रमुख केंद्र है।

नगरी सभ्यता( चित्तौड़)

✓ यह प्राचीन शिवी जनपद की राजधानी मध्यमीका के नाम से जानी जाती है।

बालाथल सभ्यता( उदयपुर)

चंद्रावती सभ्यता( सिरोही)

✓ यहां से विष्णु जी की गुरुड़ पर विराजित एकमात्र मूर्ति प्राप्त हुई।

गिलुंड सभ्यता( राजसमंद)

बयाना सभ्यता( भरतपुर)

✓ यहां से सर्वाधिक गुप्त कालीन सिक्के मिले हैं व नील की खेती के साक्ष्य मिले हैं।

नोह सभ्यता( भरतपुर)

✓ यहां पर पक्षी चित्रित इंटे मिली है।

सुनारी सभ्यता( झुंझुनू)

✓ यहां लोहे गलाने की प्राचीन भट्टी प्राप्त हुई।

कुराड़ा सभ्यता( नागौर)

✓ तांबे के ओजार की नगरी कहा जाता है।

नगर सभ्यता( टोंक)

ओझीयाना सभ्यता( भीलवाड़ा)

बरौर सभ्यता( अनूपगढ़)

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