Rajasthan ka chouhan vansh | राजस्थान का चौहान वंश | rajasthan GK

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नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आपको राजस्थान सामान्य ज्ञान का महत्वपूर्ण टॉपिक राजस्थान का चौहान वंश के बारे में बताने वाला हूँ | इस पोस्ट में मैंने राजस्थान का चौहान वंश टॉपिक को बहुत अच्छे से समझाया है |

तो चलिए शुरू करते है , राजस्थान का चौहान वंश Notes के इस महत्वपूर्ण टॉपिक को-

राजस्थान का चौहान वंश Rajasthan ka chouhan vansh

राजपूतों की उत्पत्ति

✓ राजपूतों की उत्पत्ति के संदर्भ में दो मत प्रचलित हैं।

  1. राजपूतों की देशिए उत्पत्ति का सिद्धांत – अग्निकुंड मत

(A) अग्निकुंडिए मत :

✓ इस मत के अनुसार अग्नि वंश मुल का माना गया है।

✓ इस मतानुसार ऋषि विशिष्ट ने आबू पर्वत पर यज्ञ किया था।

✓ जिसके क्रमानुसार चार पुरुष प्राप्त हुए थे प्रतिहार, परमार, चालुक्य, चौहान।

✓ इस मत के समर्थक :- मुहनोत नैंसी, चंद्रवरदाई, सूर्यमल मिश्रण।

(B) राजपूत क्षत्रियों की संतान

✓ सर्वाधिक मान्य मत।

(C) वैदिक आर्य समाज के समर्थक – C.V. वैद

(D) सूर्यवंशियं व चंद्रवंशीय – गौरीशंकर हीराचंद ,ओझा दशरथ शर्मा।

(E) ब्राह्मण वंशीय मत – गोपीनाथशर्मा

(F) प्राचीन आदिम जनजातियों से उत्पत्ति – खोखर, गॉड व डॉ.स्मिथ।

(G) सामाजिक आर्थिक क्रियाओं के कारण – बृजलाल चट्टोपाध्याय

(H) मिश्रित मत – देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय

  1. राजपूतों की विदेशी उत्पत्ति का सिद्धांत

✓ शक व सिंथियन की संतान – VA स्मिथ

✓ गुर्जरों की संतान – DR भंडारकर,DR ईश्वरी प्रसाद

✓ वह भारतीय इतिहासकार जिसने राजपूतों की उत्पत्ति गुर्जरों से तथा गुर्जरों की उत्पत्ति श्वेत हुन्नो से उत्पन्न मानी है –

Dr भंडारकर

✓युची/कुषानो का वंशज – कनिघम

✓ कनिघम 1978 के बोच गुर्जर ताम्र पत्र के आधार पर राजपूतों को कुशानो के वंशज माना है।

चौहानों की उत्पत्ति*

✓ चंदबरदाई , सर्यमल मिश्रण, मोहनोत नैंसी ने चौहानों की उत्पत्ति के संदर्भ में अग्निकुंडिय मत का समर्थन किया है।

✓ सूर्यवंशीए वंश
समर्थक : जयानक, जोधराज, नरपतिनल्ह ,गौरी चंद्र हीराचंद
ओझा

✓ चंद्रवंशी वंश : हांसी के शिलालेख आबू पर्वत पर अचलेश्वर मंदिर के शिलालेख के अनुसार।

✓ विदेशी वंशज – कर्नल जेम्स टॉड, विलियम कुक

✓ इनको अग्निवंशीय उत्पत्ति को स्वीकार करते हुए इन्हें विदेशी माना है।

✓ मत्स्य गोत्र के ब्राह्मण के वंशज
समर्थक : डॉ दशरथ शर्मा,जायम खां द्वारा रचित कायम खान रसों के अनुसार।

✓ बिजोलिया शिलालेख ने भी चौहानों को मत्स्य गोत्र के ब्राह्मण माना है।

✓ इंद्र वंशी अहमद : रायपाल के सेवाड़ी शिलालेख।

✓ खाज जाति की उत्पत्ति : Dr भंडारकर

✓ चौहान शब्द की उत्पत्ति के संदर्भ मे जयानक ने अपने ग्रंथ “चाहयान” की उत्पत्ति पृथ्वीराज विषय निम्न प्रकार बताइए।

च – चाप = युद्ध कला में निपुण
ह – हरी = ईश्वर के सम्मान
य – यान = अतिथियों का सम्मान
न – नीति = नीति का पालन

प्रमुख चौहान राजवंश

अजमेर के चौहान

स्थान प्रथम शासक
अजमेर अजय राज चौहान
रणथम्भोर गोविन्द देवराज
नाडोल लक्षमण चौहान
जालोर कीर्ति पाल
बूंदी देवा चौहान
सिरोही लुम्बा चौहान

👉 शाकंभरी सांभर के चौहान/अजमेर

संस्थापक : वासुदेव चौहान
राजवंश की स्थापना : 551वीं शाकंभरी
सांभर/ स्पाद लक्ष के आसपास का क्षेत्र

✓ बिजोलिया शिलालेख के अनुसार सांभर झील का निर्माता वासुदेव था बल्कि यह एक प्राकृतिक झील है।

✓ वासुदेव चौहान को चौहानों का आदि पुरुष, मूल पुरुष कहा जाता है।

✓ वासुदेव चौहान को चौहान राजवंश का संस्थापक भी कहा जाता है।

✓ मेरवाड़ अजमेर की राजधानी अच्छीत्रपुर।

✓ हर्षनाथ शिलालेख के अनुसार चौहानों की राजधानी अनंत प्रदेश( सीकर) थी।

✔️ वासुदेव चौहान के उत्तराधिकारी

  1. दुर्लभ राज

✓ दुर्लभ राज चौहान वंश का प्रथम शासक था। जिसके समय में अजमेर पर मुसलमानों का प्रथम आक्रमण हुआ।

  1. गुवक प्रथम

✓ इसने सीकर जिले में हर्ष नाथ मंदिर का निर्माण करवाया जहां भगवान शिव के लिंगोदभव प्रतिमा है।

✓ हर्षनाथ को चौहानों/ शाकंभरी के चौहानों के देवता कहे जाते हैं।

✓ शाकंभरी के चौहानों की कुलदेवी आशापुरा माता है।

  1. चंद्रराज

✓ चंद्रराज की रानी रुद्राणी/ आतम प्रभा भी कहा गया है।

✓ यह योगिक क्रिया में निपुण थी।

✓ यह माना जाता है कि कालसर्प से मुक्ति पाने के लिए पुष्कर के तट पर प्रतिदिन 1000 दीपक प्रभावित करती थी।

  1. विग्रहराज -II

✓ इन्होंने चालुक्य वंश के मूल राज्य प्रथम को हराकर भड़ौच ( गुजरात)में कुलदेवी आशापुरा माता का मंदिर बनवाया।

  1. गोविंद तृतीय

✓ इसमें गजनी के शासक को भारत में प्रवेश करने से रोका था।

शाकंभरी के प्रमुख शासक

अजय राज( 1103 से 1133)

✓ अजमेर राज वंश का वास्तविक संस्थापक।

✓ अजय राज, पृथ्वीराज चौहान प्रथम का पुत्र था।

✓ अजय राज के शासनकाल को चौहान साम्राज्य के निर्माण का काल माना जाता है।

✓ 1113 ई. वी. में अजय राज ने अजय मेरु दुर्ग का निर्माण करवाया।

✓ अजमेर में बिठली पहाड़ी पर अजमेरू दुर्ग का निर्माण करवाया, इसे गठ बिठली के नाम से भी जाना जाता है।

✔️ गठ बिठली/ अजमेरू दुर्ग

उपनाम : तारागढ़, राजस्थान का हृदय, अरावली का हृदय, राजपूताने की कुंजी कहां गया है।

निर्माता : अजय राज, 1113 ई. वी.

✓ विश्व हेबर ने इस दुर्ग को राजस्थान का जिब्राल्टर कहा है।

✓ सर्वाधिक स्थानीय आक्रमण इस दुर्ग पर हुए है।

✓ अजय राज ने अजय प्रिय ढूर्भस के नाम से चांदी के सिक्के चलाए। इन सिक्कों पर उनकी पत्नी सोम लेखक का चित्रण है।

अर्णोराज (1133-50)

✓ अर्णोराज ने चालुक्य राजा जयसिंह की पुत्री कंचन देवी से विवाह किया।

✓अर्णोराज मैं अजमेर में 12 मंदिरों का निर्माण करवाया जिसमें एक वराह मंदिर भी है।

✓अर्णोराज को अन्ना जी भी कहा जाता है।

✓अर्णोराज ने नाग पहाड़ व तारागढ़ के मध्य अना सागर झील का निर्माण 1137 में करवाया।

✓ चंद्र नदी के पानी को रोककर अन्ना सागर झील का निर्माण करवाया।

विग्रहराज चतुर्थ/ बीसलदेव( 1153-63)

✓ उपनाम : कटुबंधु, कवि बांधव( विद्वानों के आश्रय दाता)

✓ विग्रहराज चतुर्थ के काल को अजमेर के चौहानों का स्वर्ण काल कहा जाता है।

✓ इसमें गजनी के शासक अमीर खुसरो शाह को हराया था।

✓ 1157 में दिल्ली के तोमर वंश के शासक तवर को पराजित किया।

✓ दिल्ली से प्राप्त अशोक सम्राट शिलालेख पर बिसल देव चौहान का लेखन उत्कीर्ण किया हुआ मिला इसे शिवालिक स्तंभ लेख भी कहते हैं।

✓ विग्रहराज चतुर्थ ने संस्कृत भाषा में हरि अकेली नाटक लिखा, हरिकेली नाटक में महाभारत काल के युद्ध का वर्णन है।

✓ इस नाटक के की कुछ पंक्तियां ढाई दिन के झोपड़े पर उत्कीर्ण है।

✓ विग्रहराज ने अजमेर में 1153 में एक संस्कृत पाठशाला का निर्माण करवाया।

✓ मोहम्मद गौरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1194 में संस्कृत पाठशाला को तुड़वा कर अढाई दिन का झोपडा का निर्माण करवाया।

✓ यहां अढाई दिन का पंजाब शाह का उर्स भरता है।

✓ यहां राजस्थान की 16 खंभों की पहली मस्जिद है।

✓ कर्नल टॉड ने अढाई दिन के झोपड़े को हिंदू शिल्प कला का प्राचीनतम व पूर्णता परिष्कृत नमूना कहा है।

सोमेश्वर चौहान(1169-77)

✓ विग्रहराज चतुर्थ के पुत्र पृथ्वीराज द्वितीय की निसंतान मृत्यु हो जाने के कारण विग्रहराज चतुर्थ का भाई सोमेश्वर चौहान गद्दी पर बैठा।

✓ सोमेश्वर चौहान ने कोकण के शासक मलिकार्जुन को परास्त किया।

✓ सोमेश्वर चौहान ने दिल्ली की तोमर वंश की राजकुमारी से विवाह किया।

✓ सोमेश्वर चौहान की पत्नी कपूर देवी थी, जिसके पृथ्वीराज तृतीय व हरराय नामक दो पुत्र हुए।

✓ कपूर देवी राजपूताने वंश की पहली हिंदू महिला सरिंक्षिका थी।

✓ 1177 आबू के शासक जैतसिंह की सहायता से गुजरात के चालुक्य शासक भीम सिंह द्वितीय ने सोमेश्वर की हत्या कर दी।

  1. पृथ्वीराज तृतीय(1177-93)

✓ सेनापति – कैमास

✓ पृथ्वीराज तृतीय ने 1182 में भंडासनो का दमन किया।

✓ पृथ्वीराज तृतीय द्वारा अपने चाचा अग्रायदेव भाई नागजी का वध किया।

✓ पृथ्वीराज ने 1182 में परमार जी चंदेल को रात्रि युद्ध में हराकर मोहब्बा पर अधिकार कर लिया था।

✓ पृथ्वीराज तृतीय ने जयचंद गढ़वाल की पुत्री संयोगिता से विवाह किया।

✓ तराइन का प्रथम युद्ध 1191
( मोहम्मद गोरी व पृथ्वीराज तृतीय)
पृथ्वीराज विजय

✓ तराइन का द्वितीय युद्ध 1192( मोहम्मद गौरी विजय)

✓ हमीर महाकाव्य के अनुसार पृथ्वीराज चौहान ने गौरी को 7 बार पराजित किया।

✓ सुरजन चित्र के अनुसार पृथ्वीराज ने 21 बार पराजित किया।

✓ प्रबंध चिंतामणि के अनुसार 23 बार पराजित किया।

✓ पृथ्वीराज तृतीय के काल में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती प्रथम बार राजस्थान आए थे तथा मोहम्मद गौरी के साथ पहली बार भारत में आए।

👉तराइन का द्वितीय युद्ध के परिणाम

✓ भारत पर मुस्लिम/ तुर्क संप्रदाय की स्थापना।

✓ पृथ्वीराज चौहान की छतरी अफगानिस्तान काबुल में है।

✓ शिवराज चौहान का स्मारक अजमेर तारागढ़ में है।

✓ युद्ध के बाद का वर्णन विभिन्न स्त्रोतों के अनुसार निम्न प्रकार हैं

  • पृथ्वीराज रासो के अनुसार पृथ्वीराज को मोहम्मद गौरी गजनी ले गया।, तब चंद्रवरदाई के सहयोग से शब्दभेदी बाण से गौरी की हत्या कर दी।
  • हमीर महाकाव्य के अनुसार मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज को कैद करवा कर मरवा दिया।
  • पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली में पिथोरा नामक दुर्ग का निर्माण करवाया इसलिए इन्हें राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता है।

👉 पृथ्वीराज के दरबारी कवि : चंद्रवरदाई,जयानक, सोमेश्वर

रणथंबोर के चौहान

गोविंद राज

✓ 1192 में तराइन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज तृतीय को हराकर मोहम्मद गोरी ने अजमेर का साम्राज्य उसके पुत्र गोविंद राज को सौंप दिया।

✓ पृथ्वीराज तृतीय के भाई हरराय ने गोविंद राज को अजमेर से भगा दिया।

✓ रणथंबोर में गोविंद राज ने चौहान वंश की स्थापना की।

वीर नारायण/ वलन

✓ इसके समय इल्तुतमिश ने रणथंबोर पर आक्रमण किया।

वाग्भट

✓ इसके समय रजिया सुल्तान (भारत की प्रथम मुस्लिम शासिका) ने भारत पर आक्रमण किया।

हमीर देव चौहान(1282-1301)

✓ हमीर देव चौहान के पिता जेत्र सिंह व माता हीरा देवी थी।

✓ इसने अपने पिता जेत्र सिंह की याद में रणथंबोर में 32 खंभों की छतरी बनवाई इसे न्याय की छतरी कहा जाता है।

✓ हमीर देव चौहान साम्राज्य नीति का शासक था।

✓ हमीर देव अपनी विजय के उपलक्ष में कोटिजन यज्ञ करवाया।

✓ 1291 में जलालुद्दीन खिलजी ने रणथंबोर पर आक्रमण किया।

✓ इससे पूर्व जलालुद्दीन खिलजी ने रणथंबोर की कूंजी झंझना दुर्ग जीता।

✓ जलालुद्दीन खिलजी जून 1291 तक रणथंबोर दुर्ग का घेरा डालकर बैठा रहा परंतु दुर्ग नहीं जीत पाया। अंत में यह कहकर “ऐसे 10 किलो को मैं मुसलमान के एक बाल बराबर नहीं समझता” चला गया।

अलाउद्दीन खिलजी v/s हमीर देव चौहान

✓ हमीर देव चौहान ने अलाउद्दीन खिलजी के दुश्मनों कामरु, मोहम्मद शाह, सोमनाथ को शरण दे दी।

✓ 11 जुलाई 1301 में अलाउद्दीन खिलजी ने रणथंबोर पर आक्रमण किया।

✓ हम्मीर देव चौहान व अन्य चौहान सरदारों ने केसरिया किया व हमीर की रानी रंग देवी ने जौहर किया।

✓ जो रणथंबोर( राजस्थान) का प्रथम शाका कहलाता है। Rajasthan Ka Chouhan Vansh

✓ अलाउद्दीन खिलजी ने रणथंबोर का शासक उल्लू खान को नियुक्त किया।

✓ इस युद्ध में हमीर देव की हार का प्रमुख कारण हमीर के सेनापति रति पाल का अलाउद्दीन खिलजी के साथ मिल जाना था।

✓ अलाउद्दीन खिलजी के साथ आमिर खुसरो रणथंबोर आए थे रणथंबोर को जीतने की खुशी में अमीर खुसरो ने एक बात कही “आज कुफुर का किला इस्लाम का घर हो गया”।

✓ हमीर देव ने रणथंबोर दुर्ग में अपनी पुत्री पद्मला के नाम से पद्मला तालाब बनवाया था जिसमें पद्मला ने तालाब में कूदकर जल जोहर किया।

👉 प्रमुख ग्रंथ
हमीर महाकाव्य – नयन चंद्र सूरी
हमीर रासो – सारंगधर/ जोधराज
हमीर हठ/ सुरजन चरित्र – चंद्रशेखर

सिवाना के चौहान( बाड़मेर)

✓ सिवाना दुर्ग का निर्माण हल्देश्वर पहाड़ी पर वीर नारायण पवार ने करवाया।

✓ उपनाम : मारवाड़ के राजाओं की शरण स्थली, जालौर दुर्ग की कुंजी

✓ शासक : शातलदेव चौहान Rajasthan Ka Chouhan Vansh

✓ 1308 में सिवाना पर आक्रमण किया।

✓ अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान सातल देव वीरगति को प्राप्त होने के कारण रानी मैणा दे ने जोहर किया।

✓ सिवाना दुर्ग को जीतने के बाद शाही सेना के सेनापति कमालुद्दीन गुरक को शासक नियुक्त किया।

✓ अलाउद्दीन खिलजी ने इस ग्रुप को जीतने के बाद इसका नाम खैराबाद रखा।

जालौर के चौहान

✓ जालौर में चौहानों की सोनगरा शाखा का शासन था।

✓ जबबालीपुर, सुवरण गिरी, स्वर्ण गिरी, सोनगढ़ आदि उपनाम थे।

✓ जालौर में चौहान वंश का संस्थापक कीर्तिपाल चौहान था।

✓ 1297 में मकराना के शिलालेख में कीर्ति पाल को शिव धर्म का संस्थापक बताया।
✓ जालौर के शासक :
1. कीर्ति पाल(1182-82)
2. समर सिंह(1182-1205)
3. उदय सिंह चौहान(1205-57)

✓ उदय सिंह के शासनकाल में दिल्ली के शासक इल्तुतमिश ने जालौर पर आक्रमण किया।

✓ इसका वर्णन हमें हसन निजामी की पुस्तक ताज उल निशर में मिलता है।

कान्हडदेव चौहान(1305-1311)

✓ 1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने उल मुल्क मुल्तानी को जालौर में आक्रमण करने के लिए भेजा लेकिन यह कान्हड़ देव चौहान के साथ संधि कर लेता है ।

✓ कान्हड़ देव चौहान व पुत्र ब्रह्मदेव दिल्ली दरबार में पेश होते हैं ।

✓ दिल्ली दरबार में पेश होने के पश्चात अलाउद्दीन खिलजी की पुत्री फिरोजा को वीरमदेव से प्रेम हो जाता है।

✓ खिलजी ने विरमदेव के समक्ष फिरोजा के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा ।

✓ लेकिन विरमदेव के मना करने पर कान्हडदेव व विरमदेव वापस जालौर लौट जाते हैं ।

✓ इस कारण खिलजी ने जालौर दुर्ग पर डेरा डाल लिया और कान्हडदेव व विरमदेव के साथ युद्ध हुआ ।

✓ अंत में कान्हड़ देव व विरमदेव वीरगति को प्राप्त हो गए।

✓ इस दुर्ग को जीतने के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने इसका नाम जलालाबाद रखा।

✓कान्हड़देव प्रबंध की रचना पदमनाथ ने की।

सिरोही के चौहान

✓ सिरोही को प्राचीन काल में आबुर्द प्रदेश के नाम से जाना जाता था।

✓ प्रारंभ में इस पर परमारो का शासन था।

✓ परमारो की राजधानी चंद्रावती थी।

✓ 1311 में चौहान लुंबा सिरोही पर आक्रमण किया।

✓ सिरोही रियासत में चौहान वंश का संस्थापक लुंबा देवड़ा चौहान था।

साहसमल देवड़ा चौहान

✓इसने सिरोही नगर की स्थापना की।

✓ सिरोही को अपनी राजधानी बनाया।

✓ साहस मल के समय मेवाड़ के महाराणा कुंभा ने सिरोही पर आक्रमण किया।

✓ कुंभा ने इस विजय के उपलक्ष में सिरोही में अचलगढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया।

अखेराज चौहान

✓ खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा की अखेराज ने सहायता की।

शिव सिंह

✓ 1823 में अंग्रेजों की सहायता से संधि करने वाला शासक शिव सिंह है।

✓ सहायक संधि करने वाली अंतिम रियासत सिरोही थी।

👉 बूंदी के चौहान

  1. देवा

✓ 1342 में बूंदी रियासत के प्राचीन शासक बुंदा मीणा को पराजित कर बूंदी में चौहान वंश की स्थापना की।

✓ देवा ने अपने पुत्र समर सिंह को बूंदी का प्रमुख शासक बनाया।

✓ लेकिन कुछ समय बाद अलाउद्दीन खिलजी द्वारा बंबावड़ दुर्ग पर आक्रमण किया इस दौरान समर सिंह वीरगति को प्राप्त हुए।

✓ मेवाड़ के महाराणा क्षेत्र सिंह ने बंबवाड दुर्ग व मांडलगढ़ दुर्ग पर अपना अधिकार कर लिया।

  1. सुरजन सिंह चौहान

✓ इन के शासनकाल में बूंदी पर मेवाड़ रियासत का अधिकार हो गया।

✓ सुरजन सिंह हाडा ने 5 मार्च 1969 में मुगल बादशाह अकबर से संधि कर ली।

✓ अकबर ने सुरजन सिंह को बनारस का गवर्नर नियुक्त किया।

  1. रतन सिंह

✓ इन के शासनकाल में बूंदी को कोटा से 1631 में अलग कर दिया। Rajasthan Ka Chouhan Vansh

✓ रतनसिंह के पुत्र माधव सिंह को कोटा का शासक नियुक्त किया गया।

  1. राव राजा बुध सिंह

✓ मुगल शासक ने बुध सिंह को जयपुर के शासक जयसिंह के विरुद्ध आक्रमण के लिए कहा लेकिन बुध ने मना कर दिया।

✓ बुध सिंह के इंकार करने पर बादशाह औरंगजेब ने बूंदी को जीतकर फर्रुखाबाद नाम रख दिया।

  1. दलेल सिंह

✓ बुध सिंह के मरणोपरांत बूंदी का शासक दलेल सिंह को बूंदी का शासक नियुक्त किया। Rajasthan Ka Chouhan Vansh

✓ इसमें अमर कुमारी में रोष उत्पन्न हुआ दलेल के भाई प्रताप सिंह की सहायता से मराठा सरदार होलकर व राणा जी सिंधिया को बूंदी पर पुनः अधिकार करने के लिए बुलाया।

✓ इस प्रकार राजस्थान में मराठा का पहली बार प्रवेश बूंदी रियासत में हुआ।

✔️ कोटा के चौहान

✓ कोटा पर पहले कोटिया भील का अधिकार था।

✓ बूंदी के शासक जैत्र सिंह ने कोटिया भील को हराकर कोटा को अपनी राजधानी बनाया।

✓ 1631 में शाहजहां ने बूंदी से अलग कर कोटा रियासत की स्थापना की।

✓ कोटा रियासत का प्रथम शासक माधव सिंह था।

  1. मुकुंद सिंह

✓ राव मुकुंद सिंह ने कोटा में अमला मिनी महल का निर्माण करवाया।

✓ यह राजस्थान का दूसरा ताजमहल कहलाता है। Rajasthan Ka Chouhan Vansh

  1. राव राम सिंह

✓ 1707 में औरंगजेब के पुत्र आजम व मुअजम के मध्य जाजुआ/ उत्तराधिकारी का युद्ध हुआ।

✓ इसमें राम सिंह ने आजम की सहायता की और वीरगति को प्राप्त हुए। Rajasthan Ka Chouhan Vansh

✓ 1834 में राजस्थान में सर्वप्रथम कन्या वध पर कोटा रियासत ने प्रतिबंध लगाया था।

  1. शत्रुसाल सिंह(1865-)
  2. भीम सिंह(1940-47)

✓ एकीकरण के समय राजस्थान संघ में कोटा रियासत का विलय होने पर कोटा नरेश भीम सिंह को कोटा का राज प्रमुख बनाया।

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