Rajasthan ke lokdevta | राराजस्थान के लोकदेवता | Rajasthan Gk

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नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से आपको राजस्थान सामान्य ज्ञान का महत्वपूर्ण टॉपिक राजस्थान के लोकदेवता PDF के बारे में बताने वाला हूँ | इस पोस्ट में मैंने राजस्थान के लोकदेवता टॉपिक को बहुत अच्छे से समझाया है |

तो चलिए शुरू करते है , राजस्थान के लोकदेवता Notes के इस महत्वपूर्ण टॉपिक को-

राजस्थान के लोकदेवता | Rajasthan ke lokdevta

मारवाड़ अंचल में पांच लोक देवताओं- पाबूजी, हड़बूजी, गोगाजी, रामदेव जी, मेहाजी मांगलिया को पंच पीर माना गया है।

लोक देवता

👉 पाबूजी राठौड़

=>जन्म तेरहवीं शताब्दी में फलोदी( जोधपुर) के निकट कोलू मंड में हुआ।

=>अमरकोट के राजा सूरजमल सोडा की पुत्री से विवाह के समय जिंद राव खिची से देवल चारण की गाय छुड़वाते समय वीर गति को प्राप्त।

=>यह राठौड़ों के मूल पुरुष राम सिया के वंशज थे।

=>गौ रक्षक, प्लेग रक्षक, उंठो के देवता के रूप में भी विशेष मान्यता है। लक्ष्मण के अवतार।

=>कोलू मंड( जोधपुर) में प्रमुख मंदिर जहां चैत्र अमावस्या का मेला भरता है।

=>पाबूजी से संबंधित गाथा गीत पाबूजी के “पवाडे” मठ वाद्य के साथ नायक एवं रेबारी जाति द्वारा गाए जाते हैं।

=>पाबूजी की फड़ नाएक जाति के भोपा द्वारा रावण हत्था वाद्य के साथ बांची जाती है।

=>यह केसरिया कालमी घोड़ी एव बाएं और झुकी पाग के लिए प्रसिद्ध है।

गोगा जी चौहान

=>इनका जन्म ददरेवा( चूरू) 11वीं सदी में जेवर सिंह बाछल के घर में।

=>इन्हें जाहर पीर भी कहते हैं।

=>किसान वर्षा के बाद हल जोतने से पहले गोगाजी के नाम की गोगा राखड़ी हल और हाली के बांधता है।

=>गोगाजी के जन्म स्थल ददरेवा को शीर्ष मेडी तथा समाधि स्थल गोगामेडी को धुरमेडी भी कहते हैं।

=>गोगामेडी में प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्णा नवमी को विशाल मेला को भरता है।

=>सर्पो के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।

=>गोगाजी के थान खेजड़ी वृक्ष के नीचे होते हैं।

=>गोगाजी को हिंदू एवं मुसलमान दोनों पूजते हैं।

=>इनकी सवारी नीली घोड़ी थी।

रामदेव जी

=>रामसापीर, रुणिचे रा धनी व बाबा रामदेव नाम से प्रसिद्ध लोक देवता

=>जन्म भादवा सुदी2 संवत 1462 (1405)को उडूकश्मीर, शिव तहसील, बाड़मेर में तंवर वंशीय ठाकुर अजमाल जी के यहां माता मेनादे की कोख से हुआ।

=>रुणिचा में भादवा सुदी एकादशी संवत 1515( 1458) को जीवित समाधि ली।

=>कामडिया पंथ के प्रवर्तक।

=>श्री कृष्ण के अवतार। इनके गुरु बालीनाथ थे।

=>रामदेव जी के मंदिरों को देवरा कहते हैं।

=>रामदेवरा( रुणिचा, जैसलमेर) मैं रामदेव जी का विशाल मंदिर है, जहां भाद्रपद शुक्ला द्वितीया से एकादशी तक विशाल मेला भरता है।

=>मेले की मुख्य विशेषता सांप्रदायिक सदभाव व तेरहताली नृत्य है।

=>रामदेव जी ने समाज में व्याप्त छुआछूत, ऊंच-नीच को दूर कर समरसत्ता स्थापित की।

=>रामदेव जी कवि भी थे। इनकी रचित चौबीस बनिया प्रसिद्ध है।

तेजाजी

=>तेजाजी का जन्म 1073 ई. में हुआ । खरनाल नागौर के नागवंशी जाट।

=>अजमेर जिले के प्रमुख लोक देवता

=>मुख्य स्थान खरनाल नागौर, अजमेर के सुरसुरा ब्यावर, सेंद्रिय भावता है।

=>परबतसर( नागौर) व अन्य थानों पर भाद्रपद शुक्ला दशमी( तेजा दशमी) को मेला भरता है।

=>इनके भोपे को घोडला कहते हैं।

=>इनकी घोड़ी लीलन थी।

देवनारायण जी

=>मूल देवरा : गोठ दड़ावत ( आसींद भीलवाड़ा) । समाधि : देवमाली( ब्यावर) ।

=>यह सवाई भोज के पुत्र थे।

=>गुर्जर जाति के लोग देवनारायण जी को विष्णु का अवतार मानते हैं।

=>इनकी फड़ गुर्जर भोपा बांचते हैं।

=>यह फड राज्य सबसे बड़ी फड है।

=>इसे जंतर वाद्य के साथ बांचते हैं।

=>इस फड़ पर डाक टिकट जारी किया जा चुका है।

=>देवनारायण जी का मेला भाद्रपद शुक्ला छठ व सप्तमी को लगता है।

=>इनके प्रमुख देवरे देवमाली( ब्यावर), देवधाम जोधपुरिया( निवाई) एवं देव डूंगरी पहाड़ी( चित्तौड़) में है।

हड़बूजी

=>इनके गुरु बालीनाथ जी थे।

=>रामदेव जी के समाज सुधार कार्य के लिए आजीवन कार्य किया।

=>बेंकटी ( फलोदी) मैं हड़बूजी का मुख्य पूजा स्थल है एवं इनके पुजारी सांखला राजपूत होते हैं।

=>यह भूडोल ( नागौर) के मूल निवासी थे।

=>यह शकुन शास्त्र एवं ज्योतिष शास्त्र के अच्छे ज्ञाता थे।

मेहाजी मांगलिया

=>बापिणी( जोधपुर) में इनका का मंदिर है।

=>भाद्रपद कृष्ण जन्माष्टमी को मांगलिया राजपूत मेहाजी की अष्टमी मनाते हैं।

=>किरड काबरा घोड़ा इनका प्रिया घोड़ा था।

=> मारवाड़ के पंच पीरों में एक यह भी पीर थे।

मल्लिनाथ जी

=>इनका जन्म 1358 ई. में मारवाड़ में हुआ। यह भविष्यदृष्टा एवं चमत्कारी पुरुष थे।

=>तिलवाड़ा (बाड़मेर) में इनका प्रसिद्ध मंदिर है जहां हर वर्ष चेत्र कृष्णा एकादशी से 15 दिन का मेला भरता है।

=>जिसमें बड़ी मात्रा में पशु मेला भी भरता है। मालाणी क्षेत्र का नाम इन्ही के नाम पर पड़ा बताया जाता है। Rajasthan ke lokdevta

कल्ला जी

=>इनका जन्म मारवाड़ के सामियाना गांव में हुआ।

=>योगी भैरवनाथ इनके गुरु थे। Rajasthan ke lokdevta

=>चित्तौड़ के तीसरे साके में अकबर के विरूद्ध लड़ते हुए ये वीरगति को प्राप्त हुए

=>युद्ध भूमि में चतुर्भुज के रूप में दिखाई गई वीरता के कारण उनकी ख्याति चार हाथ वाले लोग देवता के रूप में हुई।

=>रंनेला इस वीर का सिद्ध पीठ है। भूत पिशाच ग्रस्त लोग वे रोगी पशुओं के इलाज । Rajasthan ke lokdevta

=>कल्लाजी को शेषनाग का अवतार माना जाता है।सामलिया ( डूंगरपुर) में इनकी प्रतिमा है।

देव बाबा

=>पशु चिकित्सा का अच्छा ज्ञान। गुजरो गवालों के पालनहार व कष्ट निवारक।

=>नगला जहाज( भरतपुर) में मंदिर जहां भाद्रपद शुक्ला पंचमी और चैत्र शुक्ल पंचमी को मेला भरता है।

केसरिया कंवर जी

=>गोगाजी के पुत्र जो लोक देवता के रूप में पूज्य हो गए।

=>इनका भोपा सर्पदंश के रोगी का जहर मुंह से चूस कर निकाल देता है।

वीर बिग्गाजी

=>बीकानेर जिले में जन्मे बग्गा जी ने मुस्लिम लुटेरों से गायों की रक्षार्थ अपने प्राण न्योछावर कर दिए। Rajasthan ke lokdevta

=>जाखड़ समाज इन्हें कुलदेवता मानता है।

रूपनाथ जी

=>ये पाबूजी के भतीजे थे।

=>अपने पिता और चाचा पाबूजी की मृत्यु कब बदला लेने हेतु जिंद राव खिची की हत्या कर दी।

=>कोलू मंड (जोधपुर) एवं सिंबूधड़ा (बीकानेर) में इनके स्थान हैं, हिमाचल प्रदेश में इन्हें बालक नाथ के रूप में पूजते हैं।

तल्लीनाथ जी

=>जालौर के प्रसिद्ध प्रकृति प्रेमी लोक देवता

=>इनका वास्तविक नाम गंगदेव राठौड़ था।

=>इनके गुरु जालंधर नाथ थे।

=> ये शेरगढ़ ठिकाने के शासक थे।

=>जालौर के पास पचोटा गांव के पास पाचोटा पहाड़ी पर इनका मंदिर है।

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